किसान मसीहा बाबा महेंद्र सिंह टिकैत

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किसान मसीहा बाबा महेंद्र सिंह टिकैत के सामने आला अफसर हाथ जोड़े खड़े रहते थे। उनकी हुंकार से सारा सरकारी निजाम और बड़े-बड़े सूरमा कांपते थे। छोटे से लेकर बड़े अधिकारी भी उनकी भृकुटि टेढ़ी हो जाने से डरते थे। उस शख्स ने आन्दोलन दर आन्दोलन इतने सारे आन्दोलन किये और उन आन्दोलन में ऐसी अनोखी सफलता पायी कि उस महान शख्स का नाम गिनीज वर्ल्ड बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज हो गया।

आज बाबा महेंद्र सिंह टिकैत हमारे बीच नहीं रहे। उस रहनुमा की याद में उसके अपनों की आंखों के आंसू सूखने का नाम नहीं ले रहे हैं। क्योंकि वह ऐसा मसीहा था जो उन बेकसों की बेबसी को अपनी आवाज में ढालकर बोलता था। वह जो उनके दर्द को अपने निराले अंदाज में बहरी सरकारों को दिखाता था। वह जो उनकी गूंगी जिह्ना को न केवल बोलना ही सिखा गया, अपितु जो ऐसी अनोखी शक्ति भी दे गया कि आज वही गूंगी आवाज हर जालिम अधिकारी के विरुद्ध खुलकर बोलती ही नहीं, वह भ्रष्ट अधिकारियों को आइना दिखाना भी सीख गये है।

चौ. महेन्द्र सिंह टिकैत नाम का वह चरित्र अभिनेता संसार रूपी इस नाट्य मंच पर आया और देखते ही देखता ऐसा अनोखा मंचन कर चला गया कि भारत ही नहीं अपितु पूरा संसार उसकी इस अनोखी मंचन अदायगी पर मुग्ध होकर अश्-अश् कर उठा। चौ. महेन्द्र सिंह टिकैत नामक वह अनोखा अभिनेता स्वयं में एक ऐसा महान इतिहास बनकर चला गया जिसकी किसी ने कभी कल्पना तक न की होगी।

रंगमच का यह अनोखा चरित्र अभिनेता दुनिया के सामने उस समय नमूदार हुआ, जब उसने उ. प्र. के जनपद मुजफ्फरनगर के करमूखड़ी गांव में किसानों के हितों के लिए बिजली की समस्याओं को लेकर करमूखेड़ी बिजलीघर का घेराव किया था। इसी आन्देलन से भारत के किसानों और शासकीय अधिकारियों ने उसकी असीम शक्ति को पहचाना था। इस आन्दोलन के बाद चौ. महेन्द्र सिंह टिकैत एक ऐसे सशक्त किसान नेता बनकर उभरे कि उनकी आभा से हर भ्रष्ट और काहिल सरकारी अधिकारियों की आंखें चुंधिया गयीं।

करमूखेड़ी बिलजीघर धरने से प्रसिद्ध हुए बाबा महेंद्र सिंह टिकैत

हुआ यह था कि 27 जनवरी 1987 को जनपद मुजफ्फरनगर के करमूखड़ी गांव में किसानों ने बिजली की समस्याओं को लेकर करमूखेड़ी बिजलीघर का घेराव किया था। एक लम्बे समस से बिजली की अनेकों समस्याओं से ग्रसित किसानों के इस शांत आन्दोलन में उस समय जैसे आग में घी पड़ गया जब शासन के आदेश पर पीएसी के जवानों की गोलियों से दो किसान अकबर और जयपाल सिंह की मृत्यु हो गयी। इससे किसान भी उद्वेलित हो उठे और उन्होंने पीएसी जवानों की गोलियां का सामना किया और इस जवाबी हमले में पीएसी का एक जवान मारा गया। शासन ने अपना दमन चक्र चलाया और आन्दोलनकारी किसानों के साथ अनेकों निर्दोष लोगों को भी पकड़कर जेल में डाल दिया।

किसानों के साथ हो रही इस नाइंसाफी ने घटना से चौ. महेन्द्र सिंह टिकैत बुरी तरह क्षुब्ध हो उठे और उन्होंने उ. प्र. सरकार की किसान विरोधी नीतियों के विरुद्ध 1 मार्च 1987 को करमूखेड़ी बिलजीघर पर धरना दे दिया।

चौ. महेन्द्र सिंह टिकैत ने उस धरने के दौरान जो हुंकार भरी, उसकी धमक न केवल देश में ही अपितु विदेश तक सुनी गयी। विशेष यह कि चौ. टिकैत की इस हुंकार पर करमूखेड़ी बिजलीघर पर क्षेत्र के कई लाख किसान उनके कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हो गये। लाखों किसानों ने जिस तरह टिकैत के साथ मिलकर इस धर्म युद्ध को लड़ा, उससे तत्कालिक सरकार की चूलें ही हिल गयीं।

किसानों और गरीबों की सेवा का संकल्प लिया बाबा महेंद्र सिंह टिकैत ने

इस आन्दोलन के बाद चौ. महेन्द्र सिंह टिकैत लोकप्रियता के उस शिखर पर जा खड़े हुए, जहां पहुंचने की चाह हर इंसान में होती है। वे रातों रात किसानों के महानायक बन चुके थे। और इस महानायक ने भी उसी समय अपना सारा जीवन देश के किसानों और गरीबों की सेवा के लिए समर्पित करने का संकल्प ले लिया।

चौ. महेन्द्र सिंह टिकैत नाम का वह सितारा इस तरह से जगमगाने लगा था कि उसे देख तमाम राजनैतिक पार्टियों के सरबराहों की आंखें चौंधिया गयीं। वे उनकी निकटता और उनका आशीर्वाद पाने और उनकी निकटता पाने के लिए लालायित रहने लगे। किंतु महात्मा टिकैत ने कभी भी किसी राजनेता को मुंह नहीं लगाया। वे केवल चौ. चरण सिंह का आदर करते थे और उनसे सदा आशीर्वाद लेते रहते थे।

बाबा महेंद्र सिंह टिकैत के मंच पर नेताओं के आने की मनाही थी

उनमें राजनेताओं के प्रति कितना गुस्सा था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब तत्कालिक मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह उनसे वार्ता करने सिसौली आये थे, तो उन्होंने वीर बहादुर को किसान रैली में अपने साथ घण्टों धूप में खड़ा रखा था और उन्हें करवे से ओक से पानी पीने के लिए विवश किया था।

किसानों के हित में कई सभाएं और धरने दिए

भूतपूर्व प्रधानमंत्री चौ. चरण सिंह के बाद यदि किसी ने भारत के किसानों की लड़ाई लड़ी, तो वे केवल चौ. महेन्द्र सिंह टिकैत ही थे। चौ. महेन्द्र सिंह टिकैत ने न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि सूबे से बाहर जाकर भी किसानों के हित में अनेकों आन्दोलन चलाये। चौ. महेन्द्र सिंह टिकैत ने शिव सेना प्रमुख बाल ठाकरे के साथ मिलकर मुम्बई के आजाद मैदान में विश्व व्यापार संगठन के कारण भारत के किसानों के अहित के मामले को लेकर एक लाख किसानों की एक बड़ी सभा आयोजित की थी।

देश में ही नहीं विदेशों में भी सम्मानित बाबा टिकैत

चौ. महेन्द्र सिंह टिकैत न केवल भारत के किसानों में ही लोकप्रिय थे, अपितु वे विदेशों में भी लोकप्रिय थे। किसान आन्दोलन के लिए उन्हें यूरोप के कई देशों से निमंत्रण मिला। उन्होंने जर्मनी, स्विटजरलैण्ड, ब्रिटेन, नाइजीरिया, सिंगापुर, इटली, बैल्जियम आदि देशों में किसानों के लिए काम किया। वे पढ़ाई-लिखाई के मामले में लगभग शून्य थे, किंतु व्यवहारिक ज्ञान के मामले में वे अनेकों पढ़े-लिखे कथित विद्वानों से बहुत आगे थे।

चौ. महेन्द्र सिंह टिकैत ने संवेदनहीन शासनतंत्र से सदा ही लोहा लिया और सदा अजेय समझे जाने वाले उस तंत्र को सदा विजित किया।

 

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