महान दानी और समाजसेवी चौधरी बख्तावर सिंह

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मायाहेड़ी निवासी एक पुरखा चौ. श्यामल सिंह के पुत्र का नाम चौ. चतर सिंह था। चौ. चतर सिंह के पुत्र  धीर और उनके एक  पुत्र  बख्तावर सिंह हुए। चौधरी बख्तावर सिंह के पिता का स्वर्गवास तब हो गया था जब वे केवल ढाई माह के ही थे। जब वे दो वर्ष के हुए तो उनकी माता जी का भी स्वर्गवास हो गया। बख्तावर सिंह का लालन-पालन उनकी विधवा दादी करमो, बुआ तारावती व पनियाली निवासी उदयराम ने किया। चौ. बख्तावर सिंह के अनुसार स्व. उदयराम ने अपना घर छोड़कर सारी उम्र बख्तावर सिंह के साथ रहकर उनको सहारा दिया। वे कोटद्वार स्थित विख्यात कण्व आश्रम के, जहां महाराजा भरत ने जन्म लिया था, के प्रधान हैं। खेड़ा मुगल निवासी चौ. रणबीर सिंह इस संस्था के मंत्री हैं। चौ. बख्तावर सिंह मंडी समिति और गन्ना समिति के पांच साल तक डायरेक्टर रह चुके हैं। वे सहारनपुर जिला पंचायत सदस्य भी रह चुके हैं।

कुशाग्र बुद्धि थे चौधरी बख्तावर सिंह

बख्तावर सिंह पढ़ने में बहुत ही कुशाग्र बुद्धि थे। उन्होंने 98 प्रतिशत अंकों के साथ मिडिल पास किया था। लेकिन खेती कार्य की देखरेख के कारण बुआ को उनकी पढ़ाई को बीच में ही रोक देना पड़ा था। उस समय उनके पास तीन सौ बीघा भूमि थी, जिसकी देखभाल करने वाला कोई न था। सो बुआ ने अल्पायु में ही इनके कंधें पर खेती का भार डाल दिया था। उन्होंने दिल लगाकर खेती की और दिनों दिन तेजी से उन्नति करते गये।  चौधरी बख्तावर सिंह आज पंजाबी जाट समाज के सुदृढ़ स्तम्भ हैं। पंजाबी जाटों के प्रत्येक महत्वपूर्ण आयोजन में चौ. बख्तावर सिंह की भागीदारी आवश्यक रूप से होती है। चौधरी साहब की गिनती प्रमुख समाजसेवी के अतिरिक्त क्षेत्रा के प्रमुख उद्योगपतियों में भी की जाती है। चौ.  बख्तावर सिंह सहारनपुर जनपद में छह ईंट भट्टे संचालित करते हैं। वे पन्द्रह वर्ष से उत्तर प्रदेश ईंट भट्टा निर्माता संघ के निर्विरोध् अध्यक्ष चुने जा रहे हैं।

समाजोत्थान में जुटे चौधरी बख्तावर सिंह

चौ.  बख्तावर सिंह बचपन से ही सकारात्मक विचाराधरा वाले रहे हैं। कुल 17 वर्ष की अल्पायु में उन्होंने गांव में व्याप्त आपसी मतभेदों को समाप्त करने की पहल शुरू कर दी थी। उस समय गांव में कई परिवारों में आपसी मुकदमेबाजी चल रही थी। चै. बख्तावर सिंह ने अपने सतत् प्रयास से गांव के लोगों को समझा-बुझाकर सारे झगड़ों को समाप्त कराया। इससे उत्साहित होकर बख्तावर सिंह सामाजोत्थान के कार्यों में जुट गये और दिन-दिन आगे बढ़ते गये। चौ. बख्तावर सिंह के प्रयास से पंजाबी जाटों के सात गांवों के इस समूह ने सबसे पहले बिना दहेज शादी का चलन आरम्भ किया। जो काफी सीमा तक सफल रहा है। चौ. बख्तावर सिंह के पारिवारिक दादा चौ. सुखराम सिंह के यहां, सहारनपुर के बड़े कांग्रेसी नेताओं का आना-जाना लगा रहता था। चौ. बख्तावर सिंह इन नेताओं के सम्पर्क में आने से राजनीति में रुचि लेने लगे थे। पहले वे सोशलिस्ट पार्टी से जुड़े। और जब चौ.  चरण सिंह ने कांग्रेस पार्टी छोड़कर नया दल लोकदल बनाया, तो वे भी लोकदल में शामिल हो गये। चौ. चरण सिंह की मृत्यु के बाद मुलायम सिंह के निमंत्रण पर वे समाजवादी पार्टी से जुड़ गये। आरम्भ में उन्हें सहारनपुर जनपद की कार्यकारिणी का कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया। बाद में उन्हें प्रदेश कार्यकारिणी में सदस्य पद हेतु चुना गया। तब से वे लगातार प्रदेश कार्यकारिणी में सदस्य पद के लिए मनोनीत किये जाते रहे हैं।

दान के महत्व को समझते हैं चौधरी बख्तावर सिंह

76 वर्षीय चौ.  बख्तावर सिंह पंजाबी जाट समाज के प्रमुख दानी पुरुष हैं। वे प्रति वर्ष अनेकों संस्थाओं को लाखों रुपये दान देते हैं। चौ. बख्तावर सिंह शिक्षा के महत्व को समझते हैं, इसलिए वे अनेकों शैक्षणिक संस्थाओं से जुड़े हुए हैं और इन संस्थाओं को भरपूर सहयोग देते हैं। वे महाराजा सूरजमल संस्थान, दिल्ली के संरक्षक और पनियाली स्कूल के प्रबन्ध्क व संस्थापक सदस्य हैं। उन्होंने इस स्कूल के निर्माण में महती योगदान दिया है। उन्होंने अपने प्रयास से गांव में एक प्राइमरी स्कूल की भी स्थापना करायी है। तलहड़ी बुजुर्ग में स्थापित कालेज को उन्होंने कई बार आर्थिक सहायता के रूप में अपना विशेष योगदान दिया। उन्होंने अपने निजी स्रोत से पनियाली गांव में एक किमी लम्बी सड़क का निर्माण कराया। इसके अतिरिक्त गंगदासपुर गांव को सम्पर्क मार्ग से जुड़वाया और खेड़ा मुगल, सरसीना-भरतपुर व अमौली, सीड़की व हयाना में भी विकास कार्य कराये। उन्होंने सहारनपुर नेत्रा चिकित्सालय में दो कमरे बनवाकर अपना सहयोग दिया है। पनियाली के गुरुद्वारे में वे हर निर्माण कार्य में बढ़-चढ़कर आर्थिक सहयोग देते हैं। चौ. बख्तावर सिंह 10 वर्ष तक सहारनपुर जनपद के जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष रहे हैं। सम्प्रति चौ. बख्तावर सिंह सहारनपुर जाट महासभा के अध्यक्ष हैं। उन्होंने जाट सभा का अध्यक्ष मनानीत किये जाने पर जिला जाट सभा को जाट भवन निर्माण हेतु एक हजार गज भूमि दान दी है।

चौधरी बख्तावर सिंह का परिवार

चौ.  बख्तावर सिंह के तीन पुत्र हैं-रामस्वरूप सिंह खेती कार्य देखते हैं, धर्मवीर सिंह इकबालपुर गन्ना मिल में चीफ इंजीनियर हैं और रामबीर सिंह चौ. बख्तावर सिंह के साथ मिलकर व्यवसाय संभालते हैं। रामस्वरूप सिंह के दो पुत्र हैं-हर्षवर्द्धन बेनीवाल, दो पुत्र अभिनव बेनीवाल व अभिनन्दन बेनीवाल व सिद्धार्थ  बेनीवाल। धर्मवी सिंह के एक पुत्र हार्दिक बेनीवाल हैं और रामबीर सिंह के एक पुत्र वेदान्त बेनीवाल है।

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