जाट समाज के प्रमुख स्तम्भ डा. आर वी सिंह Dr. R. V. Singh

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जाट समाज के प्रमुख स्तम्भ डा. आर वी सिंह Dr. R. V. Singh ‘आर वी आई सेण्टर’ RVS Eye Centre नाम से नेत्र चिकित्सालय चला रहे हैं। वे भारतीय चिकित्सा जगत की सबसे प्रतिष्ठित संस्था इण्डियन मैडीकल एसोसियेशन IMA के अध्यक्ष पद (नार्थ जोन) को सुशोभित कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त वे राष्ट्रीय तथा प्रांतीय स्तर की अनेकों प्रतिष्ठित संस्थाओं- जैसे-ऑल इण्डिया ओफ़्थेल्मोलोजिकल  सोसायटी (All India Ophthalmological Society)  दिल्ली व ओफ़्थेल्मोलोजिकल सोसायटी उ. प्र. के सदस्य हैं। वे दिल्ली, उ. प्र. और हरियाणा की कई सामाजिक संस्थाओं से भी जुड़े हैं।

माँ ने दिखाई Dr. R. V. Singh को उज्ज्वल भविष्य की राह

उ. प्रदेश के जनपद हाथरस के एक साधरण से गांव गड़वै, तहसील सादाबाद निवासी साधरण जाट परिवार के मुखिया अगाह चौधरी गौत्रीय स्व. चौ. हेमलाल और उनकी पत्नी स्व. श्रीमती हरप्यारी देवी की 6 संतानें हुई जिनमें 4 पुत्र और दो पुत्रियां थीं। गांव में शिक्षा का उचित माहौल नहीं था। चौ. हेमलाल और उनकी पत्नी श्रीमती हरप्यारी कम पढ़े-लिखे होने के उपरांत भी शिक्षा का महत्व जानते थे और चाहते थे कि उनकी संतानें किसी भी तरह उच्च शिक्षा ग्रहण कर उनका और उनके गांव और परिवार का नाम रौशन करें। चौ. हेमलाल दम्पत्ति ने न केवल अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने का कठोर संकल्प लिया और वे अपने बच्चों के लिए प्रेरणा स्रोत बने। श्रीमती हरप्यारी ने तो जैसे अपने जीवन का लक्ष्य ही बना लिया था कि वे अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाकर रहेंगी। इसीलिए उन्होंने गांव के एक आम संघर्षशील साधरण परिवार से होते हुए भी अपने बच्चों की शिक्षा हेतु कभी धन की कमी न आने दी। Dr. R. V. Singh बताते हैं, ‘मेरी मां की यह प्रबल इच्छा थी कि उनके चारों पुत्र गांव में सबसे अध्कि उच्च शिक्षा प्राप्त कर उनका व उनके समाज का नाम रौशन करें। मां की इसी भावना की कद्र करते हुए Dr. R. V. Singh ने लगन के साथ पढ़ाई पूरी की। मेरी मां की प्रेरणा ही थी कि मैं आज इस पद पर पहुंचने में सफल हो सका।’

Dr. R. V. Singh के पूरे परिवार ने जाट समाज का नाम रोशन किया

माता-पिता के त्याग और सतत् प्रयासों का परिणाम यह निकला कि चै. हेमलाल दम्पत्ति के चारों पुत्र आज शिक्षा जगत के दैदिप्यमान सितारों की तरह चमक रहे हैं। इस दम्पत्ति के बड़े पुत्र श्री हरि सिंह जहां उच्च शिक्षा प्राप्त कर पुलिस इंसपेक्टर बने, वहीं उनके दूसरे क्रम के पुत्र श्री नेपाल सिंह एफसीआई में मैनेजर हुए, तीसरे व चैथे क्रम के श्री राजबीर सिंह व श्री आर वी सिंह Dr. R. V. Singh डाक्टर बने। डा. राजबीर सिंह अमेरिका में और डा. आर वी सिंह दिल्ली में विख्यात नेत्र चिकित्सक के रूप में अपने गांव और परिवार का नाम रौशन कर रहे हैं।

निशुल्क कैंपों के जरिये कर रहे समाज सेवा Dr. R. V. Singh

जाट समाज के एक प्रमुख स्तम्भ के रूप में विख्यात डा. आर वी सिंह Dr. R. V. Singh ने एमबीबीएस और एम एस करने के बाद इंगलैण्ड से आंखों की बीमारियों और आप्रेशन सम्बन्धी विशेष शिक्षा ग्रहण की और 1993 से शालीमार बाग दिल्ली में आधुनिकतम मशीनों से युक्त ‘आर वी आई सेण्टर’ RVS Eye Centre नाम से नेत्र चिकित्सालय चला रहे हैं। साथ ही वे दिल्ली के प्रख्यात अस्पताल सरोज हास्पिटल एण्ड हार्ट इंस्टीट्यूट में भी नेत्र विभाग के प्रमुख के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मानवता के लिए समर्पित डा. आर वी सिंह ने दिल्ली देहात के गरीब बस्ती क्षेत्रों में अब तक 250 से अधिक निःशुल्क नेत्र चिकित्सा कैम्प लगाये हैं और मोतियाबिंद से पीड़ित हजारोें मरीजों का निःशुल्क आप्रेशन और उपचार किया है।

डा. सिंह की मानवता की सेवा भावना के कारण दर्जनों सामाजिक संस्थाओं ने उन्हें सम्मानित किया है। उन्हें चिकित्सा जगत की कई संस्थाओं-जैसे अलीगढ़ मैडीकोज एसोसियेशन, आईएमए दिल्ली नोर्थ जोन, भारत सरकार के श्रम मंत्रालय द्वारा आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से पूर्व राष्ट्रपति माननीय डा. ए पी जे अब्दुल कलाम और भूतपूर्व मंत्री स्व. साहब सिंह वर्मा के कर कमलों द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। डा. आर पी सिंह का विवाह डा. सुरेखा से हुआ है। डा. सुरेखा मैक्स हास्पीटल में कार्यरत हैं। डा. सिंह दम्पत्ति के एक पुत्री  सुरभि (एमबीबीएस में अध्ययनरत) व पुत्र समीर सिंह है।

बेटी बचाओ तो समाज बचेगा का सन्देश देते हैं डा. आर वी सिंह Dr. R. V. Singh

जाट समाज को दिये अपने संदेश में डा. आर वी सिंह Dr. R. V. Singh कहते हैं, ‘जाट समाज के प्रत्येक जागरूक इकाई को यह व्रत लेना होगा कि अपने सभी बच्चों को उच्च से उच्च शिक्षा दिलायेंगे। हमारे जमाने में कोई आरक्षण नहीं था। मैंने अपनी मां की प्रेरणा से गरीबी से लड़ते हुए उच्च शिक्षा प्राप्त की। आज सबसे महत्वपूर्ण बात है उच्च शिक्षा प्राप्त करने की। दूसरे हमारे समाज को नष्ट कर रही दहेज लेने की प्रथा को हम खत्म करें और दहेज में दिये जाने वाले धन को अपने बच्चों की शिक्षा पर खर्च करें। उन्हें उच्च शिक्षा दिलाकर योग्य बनाएं। अगर हम अब भी नहीं चेते, तो एक दिन हम अति पिछड़े हो जायेंगे। दहेज में होने वाली अनाप-शनाप मांगों से डरकर लोग अपनी कन्याओं की गर्भ में ही हत्याएं करा रहे हैं। यह बहुत बड़ा पाप है जिसके जिम्मेदार वे लोग हैं जो दहेज के नाम पर अपने बेटों की बोलियां लगाते हैं। जब हमारे बेटियां ही नहीं होंगी, तो हमारा समाज कितने दिन चलेगा। हमें बेटियों को भी बेटों की तरह ही उच्च शिक्षा दिलानी चाहिए। बेटियों को शिक्षित करने से हमारे समाज में तेजी से उन्नति होगी। क्योंकि संस्कारयुक्त शिक्षित बेटियां आने वाले सभ्य समाज की निर्मात्री होंगी और उनकी शिक्षा से प्रेरित होकर ही हमारा आने वाला समाज कन्या भ्रूण हत्या के पाप से स्वयं को बचायेगा।

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