बाबा महेन्द्र सिंह टिकैत के आन्दोलन

Please Share!

दिल्ली और देश भर में किसानों का आन्दोलन चल रहा है. किसान पुरजोर तरीके से अपनी मांगें उठा रहे हैं, लेकिंन सरकार किसानों की मांगों पर ध्यान नहीं दे रही है. ऐसे में याद आते हैं बाबा महेंद्र सिंह टिकैत. उन्होंने अपने किसान आन्दोलनों से दिल्ली दरबार को हिला डाला था. आइये देखते हैं बाबा महेंद्र सिंह टिकैत के आन्दोलन, जिन्होंने सरकारों को झुकने को मजबूर कर दिया था.

  • किसानों की बिजली की समस्या को लेकर चौ. महेन्द्र सिंह टिकैत के निर्देशन में 27 जनवरी 1987 से 30 जनवरी 1987 तक करमूखेड़ी (मुजफ्फरनगर) बिजली घर का घेराव किया।
  • 27 दिसम्बर 1987 से 19 फरवरी 1987 तक किसानों की 35 सूत्रीय मांगों को लेकर 24 दिन मेरठ कमिश्नरी का घेराव किया। यह भारतीय इतिहास का किसानों का अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक घेराव था, जिसने चौ. महेन्द्र सिंह टिकैत को अत्यंत प्रसिद्धि दिलायी। इस आन्दोलन ने चौ. महेन्द्र सिंह टिकैत को चौ. चरण सिंह के अलावा उत्तर प्रदेश का ऐसा ताकतवर किसान नेता बना दिया जिसकी एक आवाज पर लाखों किसान जान न्यौछावर करने के लिए तैयार रहते थे।
  • इसके बाद महात्मा टिकैत ने रजबपुर (मुरादाबाद) में किसानों के हित के लिए किसान यूनियन ही नहीं भारत के इतिहास का सबसे लम्बा धरना आन्दोलन चलाया जो 6 मार्च 1988 से लेकर 23 जून 1988 तक अर्थात पूरे 110 दिन तक चला।
  • चौ. महेन्द्र सिंह टिकैत के निर्देशन में किसान यूनियन का अगला आन्दोलन दिल्ली में वोट क्लब पर हुआ जो 25 अक्तूबर 1988 से लेकर31 अक्तूबर 1988 तक सात दिन चला।
  • 3 अगस्त 1989 को मुज़फ्फरनगर  के भोपा कस्बे के पास गंग नहर पर नईमा अपहरण तथा हत्याकाण्ड के विरोध में 39 दिवसीय धरना दिया।
  • 2 अक्तूबर 1989 को देश के अन्यान्य किसान संगठनों के साथ किसानों की समस्याओं पर दिल्ली के वोट क्लब पर धरना दिया।
  • उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 14 जुलाई 1990 से 22 जुलाई 1990 तक 9 दिवसीय धरना दिया।
  • 19 दिसम्बर 1991 से 17 जनवरी 1992 तक किसानों की गन्ना उपज बिजली के बढ़े बिल और किसानों की अन्य समस्याओं और टेल्को भूमि अधिग्रहण मामले में 30 दिन का धरना दिया।
  • 2 अक्तूबर 1991 को किसानों की उपज की समस्याओं और खाद सब्सीडी मामले में दिल्ली में धरना दिया।
  • 31 दिसम्बर 1991 से 17 जनवरी 1992 तक लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में किसानों की बिजली और खाद के बढ़े मूल्यों की समस्या को लेकर 18 दिन का धरना दिया।

 

  • गाजियाबाद के उन किसानों के समर्थन में जिनकी जमीन 1962 में सरकार द्वारा अधिग्रहीत की गयी थीं लेकिन जिन्हें अभी तक भी उनकी जमीन का उचित मुआवजा नहीं दिया गया था, 2 जून 1992 से 17 अगस्त 1992 तक धरना दिया। यह धरना 77 दिन चला था।
  • 2 जून 1992 से लेकर 3 जुलाई 1992 तक चौ. महेन्द्र सिंह टिकैत के निर्देशन में लखनऊ में किसानों की दस हजार रुपये तक की कर्जा माफी और अन्य 7 मांगों को लेकर धरना दिया।
  • चौ. महेन्द्र सिंह टिकैत ने 4 फरवरी 1993 से लेकर 6 फरवरी 1993 तक उत्तर प्रदेश के किसानों में जागृति पैदा करने और किसानों की समस्याओं के विषय में प्रदेश के लखनऊ, बाराबंकी, मऊ, सुल्तानपुर, जौनपुर, गोरखपुर और बलिया जनपदों में वृहद् स्तर पर पंचायतें आयोजित कीं।
  • 3 मार्च 1993 से 4 मार्च तक किसानों पर लादे जा रहे डन्कल बीज प्रस्ताव के विरोध में दिल्ली में दो दिवसीय धरना दिया।
  • 27 जून 1993 से लेकर 30 जून 1993 तक चिन्हट (लखनऊ) में किसानों की भूमि अधिग्रहण मसले पर किसानों की गिरफ्रतारी के विरोध में और गिरफ्रतार किसानों की रिहाई को लेकर 4 दिवसीय धरना दिया।
  • 17 सितम्बर 1993 से 19 सितम्बर 1993 तक नई दिल्ली में किसानों की मांगों विशेषकर डंकल प्रस्ताव के विरोध तथा बीज सत्याग्रह के सम्बन्ध में धरना दिया।
  • 26 सितम्बर 1993 से लेकर 4 अक्तूबर 1993 तक उ. प्र. के किसानों की सात मांगों, विशेषतः रामकोला के किसानों पर गोलीकाण्ड, गन्ने का भुगतान तथा दस हजार रुपये तक के कर्जों की माफी के सम्बन्ध में 4 दिन का धरना दिया।
  • 16 अगस्त 1995 को उ. प्र. की मुख्यमंत्री मायावती से चौ. महेन्द्र सिंह टिकैत की किसानों की समस्याओं के सम्बन्ध में वार्ता हुई।
  • 17 सितम्बर 1995 को प्रदेश की राजधानी लखनऊ में किसान महा पंचायत का आयोजन किया।
  • 7 मार्च 1996 को दिल्ली में चौ. चरण सिंह की समाधी किसान घाट पर उत्तर भारत के लगभग दो लाख किसानों की उपस्थिति में देश बचाओ- किसान बचाओ महापंचायत का आयोजन किया।
  • 17 फरवरी 1999 को उ. प्र. के प्रत्येक तहसील मुख्यालय पर किसान प्रदर्शन की घोषणा।
  • 13 अक्तूबर 1999 को बाराबंकी में किसान महापंचायत में सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ असहयोग आन्देलन जारी रखने की घोषणा।
  • 29 अक्तूबर 1999 को विश्व व्यापार संगठन के खलाफ एवं कृषि उपजों के लाभकारी समर्थन मूल्य देने की मांग को लेकर जंतर-मंतर, दिल्ली में एक दिवसीय धरना।
  • 13 फरवरी 2000 को लखनऊ के बेगम हजरत महल पार्क में किसान महापंचायत का आयोजन।
  • 17 मार्च 2000 को विश्व व्यापार संगठन के कारण भारत के किसानों के अहित के मामले को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के भारत आगमन पर देश के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को बिल क्लिंटन के नाम ज्ञापन दिया।
  • 25 मार्च 2000 को महात्मा टिकैत की उ. प्र. के मुख्यमंत्री राम प्रकाश गुप्त से किसानों की समस्याओं को लेकर वार्ता हुई।
  • 5 सितम्बर 2000 को दक्षिणी एशिया के किसानों का एक सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित हुआ जिसमें विश्व व्यापार संगठन द्वारा दक्षिणी ऐशिया के देशों के किसानों के शोषण, विकासशील देशों की कृषि व्यवस्था को नष्ट करने की कोशिश का मुकाबला करने के 10 सूत्रीय प्रस्ताव पारित हुआ।
  • 26 सितम्बर 2000 को राष्ट्रपति अबुल कलाम को एक ज्ञापन दिया जिसमें मांग की गयी थी कि भारतीय खेती को विश्व व्यापार संगठन से बाहर रखा जाए।
  • 29 सितम्बर 2000 को केन्द्र सरकार की किसान विरोधी नीतियों के विरोध में किसान घाट से ससंद घेराव का आयोजन किया।
  • फरवरी 2001 में कृषि उत्पाद के आयात के विरोध में मुम्बई के आजाद मैदान में विशाल प्रदर्शन किया।
  • 3 नवम्बर 2001 को उ. प्र. के गन्ना उत्पादक किसानों की बरबादी एवं कृषि को विश्व व्यापार संगठन से बाहर रखने के लिए ससंद मार्ग दिल्ली पर प्रदर्शन किया।
  • 8 नवम्बर 2002 को उ. प्र. की चीनी मिलों को समय से चलाने की मांग को लेकर मंसूरपुर रेलवे फटक एक दिन के लिए बंद किया और अगले दिन से पशुओं के साथ जेल भरो आन्दोलन की घोषणा की।
  • दिसम्बर 2002 में पोंटा साहब, हिमाचल में किसानों के हितों के लिए विराट प्रदर्शन तथा धरना दिया।
  • सितम्बर 2004 में मुम्बई के आजाद मैदान में दो लाख किसानों को लेकर देश के किसानों की समस्याओं को लेकर विराट धरना व प्रदर्शन किया।
  • 8 अप्रैल 2008 को उत्तर प्रदेश सरकार के विरुद्ध लखनऊ में विराट किसान महापंचायत का आयोजन किया।
  • 1 अप्रैल 2008 को किसान नेताओं के उत्पीड़न के मामले में उ. प्र. की मुख्यमंत्री मायावती से सीधा टकराव हुआ। बिजनौर में हुई एक विशाल रैली में महात्मा टिकैत ने प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ एक तल्ख टिप्पणी कर दी थी। इससे सारे सियासी हलकों में जैसे भूचाल आ गया था। बाबा टिकैत पर व्यक्तिगत आपराधिक मामला दर्ज किया गया था।

 

 

Related Posts