1857 की क्रांति में सर्वखाप पंचायत का योगदान

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सर्वखाप पंचायत द्वारा सेना के लिए भोजन और मिठाइयाँ

9 जुलाई को सर्वखाप पंचायत की ओर से दिल्ली में एकत्र हिंदुस्तानी सेना के 15951 सैनिकों को सुरुचिकर भोज्य सामग्री व मिठाई आदि भेजी गयी थी। इस भोजन में दूध, मिठाईयां, तथा बढ़िया-बढ़िया खाने थे। सर्वखाप पंचायत के प्रतिनिधि श्रीचंद ने बादशाह के सम्मुख सर्वखाप पंचायत का एक निर्णय पढ़कर सुनाया, जिसमें बादशाह को आश्वासन दिया गया था कि सर्वखाप पंचायत नित्य ही उनके सभी सैनिकों के लिए इसी प्रकार सुरुचिपूर्ण खाना भेजने की व्यवस्था करेगी और खाने की कोई कमी नहीं होने देगी। सोहनबीरी नामक एक वृद्धा जाटणी ने सैनिकों को राखी बांधकर उनको देश सेवा की शपथ दी।

इस दिन अंगे्रजी सेना ने भारतीय सेनाओं पर कई बार आक्रमण किये। किंतु सर्वखाप पंचायत के जवानों ने उनके हमलों को हर बार विफल कर दिया। उस दिन के युद्ध में हरयाणा सर्वखाप पंचायत को बहुत अधिक हानि उठानी पड़ी थी और उसके 5000 वीर शहीद हुए थे।

हरियाणा सर्वखाप पंचायत की स्त्रियों ने भी लड़ा युद्ध

हरयाणा सर्वखाप पंचायत के रिकार्ड के अनुसार एक वृद्धा स्त्री ज्ञानदेवी ब्राह्मणी की अगुवाई में लगभग 255 स्त्रियां भी 25 जत्थों के रूप में युद्ध लड़ी थीं। इनमें से एक जत्था जाटणी हरकौर का था। हरकौर और उसके जत्थे की स्त्रियां इस वीरता के साथ लड़ीं कि शत्रु ही नहीं उनके पक्ष के वीर भी उनका शौर्य देखकर दंग रह गये थे। ये सभी वीरांगनाएं युद्ध लड़ते हुए शहीद हो गयी थीं।

हरियाणा सर्वखाप पंचायत का क्षेत्र

सर्वखाप पंचायत के अन्तर्गत आने वाले क्षेत्रों-मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, गाजियाबाद, बुलन्दशहर, अलीगढ़, मथुरा, आगरा, बल्लभ गढ़, फरीदाबाद, गुड़गांवा, बहादुरगढ़, रोहतक, हांसी, हिसार, पानीपत, सोनीपत, करनाल तथा वर्तमान दिल्ली आदि क्षेत्रें के जाटों ने सर्वखाप पंचायत के आदेश पर बादशाह बहादुरशाह जफर के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा दी थी। इस युद्ध में सर्वखाप पंचायत के लगभग दस हजार मल्ल शहीद हुए थे जिनमें जाट मल्लों की संख्या लगभग सात हजार थी।

1857 की क्रांति में पुरबालियान गाँव के 155 वीरों ने लड़ा युद्ध

सर्वखाप पंचायत के अकेले पुरबालियान गांव के 155 जाटों ने बहादुरशाह जफर की सेना के साथ मिलकर अंग्रेजी सेना से युद्ध किया था। इस गांव के 16 व्यक्ति उस समय अंग्रेजी सेना में अधिकारी या सैनिक थे। वे सभी विद्रोह होने पर विद्रोहियों के साथ मिल गये थे। वे लोग विद्रोह दब जाने के बाद भूमिगत हो गये थे। अंग्रेज पुलिस ने इन्हें पकड़ने का भरसक प्रयास किया, किंतु वे पकड़े नहीं जा सके।

 पुरबालियान गाँव के 64 वीर हुए शहीद

उनके ऐवज में पुलिस ने उनके परिवार वालों को गिरफ्तार कर लिया और उनमें से कईयों को फांसी पर लटका दिया। उन सबकी भूमि छीन ली गयीं। यहां के 24 लोगों को विद्रोह करने के दण्डस्वरूप भूमि में गाड़कर उन पर कुत्ते छोड़ दिये गये। इस गांव के 23 आदमी अंग्रेजी सेना के साथ मुठभेड़ में मारे गये। 41 आदमियों को पेड़ों पर लटकाकर बड़े ही क्रूर तरीके से फांसी दी गयी।

 शोरम गाँव से होता है सर्वखाप पंचायत का मंत्री

संवत 1362 वि. में शौरम गांव के बालियान खाप के एक परिवार के चौ. राव राम राणा को इस पंचायत के मंत्री पद पर नामित किया गया और यह निश्चित किया गया कि इसी परिवार की प्रत्येक पीढ़ी का बड़ा पुत्र ही इस संगठन का मंत्री हुआ करेगा। तभी से यही परम्परा चली आ रही है। इसी परम्परा के अनुसार कुछ समय पूर्व तक अति ख्याति प्राप्त चौ. कबूल सिंह सर्वखाप पंचायत के मंत्री रहे। उनके बाद उनके बड़े पुत्र फेरू सिंह और उनके पश्चात् उनके बड़े पुत्र सुभाष चौधरी सर्वखाप पंचायत के मंत्री पद पर आसीन हैं।

सर्वखाप पंचायत के वर्तमान मंत्री सुभाष चौधरी

चौ. कबूल सिंह पंचायती व्यक्ति थे। पूरे जाट समाज में उन्हें विशेष सम्मान प्राप्त था। उन्होंने अपना तन-मन-धन सब कुछ कौम के लिए अर्पित कर दिया था। उनके पोते श्री सुभाष चौधरी भी इसी प्रवृत्ति के हैं। उनके पास जाट समाज से सम्बन्धित किसी भी तरह की सूचना लेने हेतु जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति का उनका पूरा परिवार सदा हार्दिक स्वागत करता है। यहां तक कि जाट इतिहास के शोधार्थियों को वे अपने घर पर कई-कई दिन तक प्राश्रय भी देते हैं। जाट संस्कृति की संवाहक उनकी पत्नी श्रीमती प्रमिला देवी अपने घर आये प्रत्येक व्यक्ति का हृदय से स्वागत करती हैं।

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