गोकुल सिंह जाट का मुगल सत्ता को उत्तर

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गोकुल सिंह जाट का मुगल सत्ता को उत्तर

औरंगजेब ने जितनी बार भी गोकुल सिंह जाट (गोकला जाट) पर नियंत्रण करने का प्रयास किया, उसे हर बार असफलता ही हाथ लगी. गोकला जाट से बार-बार पर परास्त  होने से औरंगजेब ने  गोकला जाट से संधि करने का निर्णय किया. गोकला को संधि  प्रस्ताव  भेजा गया. सन्देशवाहक ने गोकला को संधि करने और औरंगजेब से क्षमा मांगने को कहा. गोकला ने इस संधि को ठुकराते हुए संधि प्रस्ताव देने वाले  से पूछा, ‘हमारा अपराध क्या है जो मैं बादशाह से क्षमा चाहूंगा? तुम्हारे बादशाह को मुझसे क्षमा मांगनी चाहिए. उसने अकारण ही मेरे धर्म का अपमान किया है। दूसरे उसके क्षमादान और मित्रता का भरोसा इस संसार में कौन कर सकता है? उसने कुरान को साक्षी बनाकर अपने सगे भाई मुराद से जो वादे किये थे, उन्हें तुम अच्छी तरह से जानते हो। कुरान भी मुराद को कत्ल होने से नहीं बचा सकी।”

औरंगजेब की दरिंदगी याद दिलाई गोकुल सिंह जाट ने

गोकला ने कहा, “तुम्हारा मालिक औरंगजेब इतना स्वार्थी और नीच है कि उसने न सिर्फ अपने भाइयों और भतीजों की ही हत्या की, बल्कि वह अपने बड़े बेटे मुहम्मद सुल्तान को भी धीमा जहर देकर उसे मौत के मुंह में धकेल रहा है। उसको न तो अपने जवान बेटे की जवानी पर दया आयी है और न ही वह उसकी बेगम पर ही दया कर रहा है। कुतुबशाह की बेटी से पूछना कि उसका ससुर कितना भला आदमी है। वह बेचारी जो 10-12 साल से एक बेवा की तरह जिंदगी काट रही है, एक पल को भी नहीं भूल सकती कि औरंगजेब के हुकम पर उसके शौहर को धीमा जहर देकर मारा जा रहा है। क्षमादान तो अभी तीन वर्ष पहले शिवाजी को भी मिला था न? कुंवर रामसिंह न होते, तो शिवाजी अब तक स्वर्ग सिधार गये होते। वे भाग्यशाली थे कि राजा जयसिंह का वरद्हस्त उनके ऊपर था।’

औरंगजेब की चालाकी को समझते थे गोकुल सिंह जाट

गोकला जाट ने औरंगजेब के संदेशवाहक से कहा, “तुम चाहते हो कि मैं उस सामान को जो मैंने खुले आसमान में अपने बाजुओं के जोर से पाया है, तुम्हारे चालाक बादशाह को लौटा दूं, जिससे कि हम फिर से पंख कटे कबूतर की तरह रह जाएं। तुम्हें और तुम्हारे बादशाह को यह जानकर बहुत मायूसी होगी कि वह सामान मेरे पास नहीं है। मैं उस सामान को अपने पास रखता ही नहीं। मैं इसे अपने जांनिसारों के बीच बांट देता हूं ताकि वे बाज बन सकें। मैं रहूं न रहूं, वह सामान अब मुगलों को नहीं मिलेगा। वह तो अब तुम्हारी कब्रें खोदने के काम आयेगा।’

गोकुल सिंह जाट ने औरंगजेब को बताया खानदानी लुटेरा

‘गोकला जाट ने औरंगजेब के संदेशवाहक से कहा, “औरंगजेब मुझे लुटेरा साबित करने पर तुला है। तुम्हें मालूम हो कि असली लुटेरा तुम्हारा बादशाह और शाहजादे हैं। हम उनकी तरह अपनी प्रजा को नहीं लूटते। अभी कुछ समय पहले शाहजादा मुराद ने सूरत शहर को लूटा था। तुम्हारे बादशाह के बाप ने भी जी भरकर लूटमार की थी। उसने तो आगरा और फतेहपुर सीकरी को भी नहीं छोड़ा था। तुम्हारे बादशाह के ताया खुसरो ने भी लूटमार की थी। जिनकी हिफाजत करना इनका धर्म था, उनको ही इन्होंने जी भरकर लूटा। वे खानदानी लुटेरे हैं। वे बाहर से आकर हमारे मालिक बनकर बैठ गये हैं। इस पत्र के साथ आरसी (दर्पण) भिजवा रहा हूं। उसमें पहले अपना चेहरा देखना, फिर वही आरसी अपने बादशाह को दिखाना। तुम्हारे महल के आरसी खुशामदी हो गये हैं न। वे बादशाह को कभी उसका सही चेहरा नहीं दिखाते।’

गोकला जाट ने औरंगजेब को दी चेतावनी

रही बात भविष्य के लिए वचन देने की। भला मैं भविष्य के लिए मैं मुगलों को क्या वचन दूं? क्योंकि मेरा तो कोई भविश्य ही नहीं है। क्योंकि मैं किसी राज्य या जागीर को बचाने के लिए नहीं लड़ रहा हूं। मैंने तो हिंदुस्तान की मान-मर्यादा की रक्षा के लिए तलवार उठायी है। मैं यह अच्छी तरह से जानता हूं कि जब तक बादशाह औरंगजेब तख्त पर बैठा है, तब तक हिंदुस्तान की मान-मर्यादा खतरे में है। इसलिए अब हम दोनों में से एक को ही रहना है। या तो बादशाह औरंगजेब रहेगा या यह नाचीज गोकुल।’

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