खेकडा के अंकुर धामा को मिला अर्जुन पुरूस्कार

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मंगलवार शाम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया सम्मानित

Ankur Dhama – अगर कुछ करने की तमन्ना हो और दिल में हौंसला हो तो कोई भी मुश्किल, कोई भी बाधा लक्ष्य को हासिल करने से नहीं रोक सकती। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है खेकडा नगर निवासी एथलीट अंकुर धामा ने। उन्हें मंगलवार का दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में अर्जुन पुरूस्कार से सम्मानित किया गया। इससे कस्बे में खुशी का माहौल है। अंकुर के घर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

अंकुर धामा एक पैरालिंपिक ऐथलीट हैं, जिनकी आंखों की रोशनी बचपन में ही चली गई थी। लेकिन हौसलों की उड़ान नहीं थमी। उन्होंने दुनिया भर में लगातार कई पैरा चौंपियनशिप्स में पदक जीते। वह स्कूलिंग के दौर से ही ऐक्टिव स्पोर्ट्समैन थे। स्कूल में पढ़ाई के दौरान ही पहली बार उन्होंने इंटरनैशनल टूर्नमेंट में हिस्सा लिया था। उन्होंने 2009 में आयोजित हुए वर्ल्ड यूथ ऐंड स्टूडेंट चौंपियनशिप्स में दो गोल्ड मेडल जीते थे। 2008 में आयोजित इंडियन ब्लाइंड्स असोसिएशन नैशनल मीट में उन्होंने 400 और 800 मीटर में गोल्ड जीता था। उन्होंने  क्रमश 1ः10 और 2ः25 मिनट में रेस पूरी कर रेकॉर्ड कायम किया था। सेंट स्टीफन्स कॉलेज से हिस्ट्री में ग्रैजुएशन करने वाले अंकुर धामा को शुरुआत में स्पॉन्सर्स की कमी थी। लेकिन, बाद में उन्हें द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता कोच सतपाल सिंह का सहारा मिला और वह रियो पैरालिंपिक में खेले।

अंकुर धामा के किसान पिता इंद्रपाल सिंह को काफी ईलाज कराने के बाद जब ये मालूम पड़ा कि अब किसी सर्जरी से उनके बेटे का इलाज हो सकता तो अंकुर को दिल्ली के ब्लाइंड स्कूल में प्रवेश करा दिया। बाद में अंकुर ने खेल प्रतिभा के जरिए देश विदेश में नाम कमाया। उसका चयन अर्जुन अवार्ड के लिए हुआ। मंगलवार को राष्ट्रपति ने अंकुर को अवार्ड दिया। इससे खेकडा नगर वासियों में खुशी की लहर दौड गई है। देर शाम तक परिवार को बधाई देने वालों का तांता लगा रहा।

 

दृष्टिहीन पैरालिंपियन अंकुर धामा की कहानी –

भारतीय ऐथलीट्स आमतौर पर सरकारी सहयोग के बिना व्यक्तिगत स्तर पर ही मैदान में करामात दिखाने के लिए जाने जाते रहे हैं। अंकुर धामा ने बिना किसी सुविधा के अपनी इच्छाशक्ति के बूते ही मंजिल हासिल की। उसका एडमिशन दिल्ली के लोदी रोड स्थित जेपीएम सीनियर सेकेंड्री स्कूल फॉर ब्लाइंड में करवा दिया। उसी समय से अंकुर को स्पोर्ट्स से लगाव हो गया और वे अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी खेलने लगे। तीस साल के इतिहास में पहली बार अंकुर धामा 2016 के पैरालंपिक में भाग लेने वाले ब्लाइंड एथलीट बने। लेकिन 1500 मीटर की टी11 एथलेटिक्स स्पर्धा में दूसरे स्थान पर रहने के बावजूद वे फाइनल क्वालीफाई करने में नाकाम रहे।

स्कूल में पहली बार अंकुर धामा ने इंटरनेशनल टूर्नामेंट में भाग लिया। 2009 में अंकुर ने वर्ल्ड यूथ ऐंड स्टूडेंट चौंपियनशिप में दो गोल्ड मेडल जीते थे। 2014 में एशियन पैरागेम्स में उन्होंने एक सिल्वर और दो कास्य मेडल जीते। मार्च में दुबई के एशिया ओसेनिया चौंपियनशिप के पैरालंपिक के लिए क्वालीफाई किया। उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन सेंट स्टीफंस कॉलेज से पूरी की है। इस समय वह दिल्ली यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहे हैं।

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